बात छोटीसी होती है...उसका बतंगड बना कर उसे बडी बनाई जा सकती है।...जैसे कि गुब्बारा...और राई का पहाड!
Friday, 14 March 2008
टॉम एंड जेरी शो पार्ट 19
‘TOM AND JERRY SHOW’-Part-19
...हम धम्म से सोफे पर आ बैठे! धामी चला गया था. पता नहीं इस समय, रात के अंधेरे में कहां गया होगा?...उसके रहने की तो कोई जगह नहीं थी.हम धामी के बारे में ज्यादा कुछ भी नहीं जानते थे; फिर भी हम फफक,फफक कर रो पड़े.
...शायद हमें रोते हुए देख कर हमारा lovely हमारे पास आया और हमारी गोद में छलांग मार कर बैठ गया.अरे! वो दोनों बदमाश टॉम और जेरी भी वहां आ कर हमारे सामने खड़े हो गए.हमें गुस्सा तो आया, पर हम बहुत दुखी हो रखे थे...इसलिए हमने उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया. अब हम lovely को गोदी से नीचे उतार कर सोफे पर ही लेट गए और हमारी आंख लग गई.
....सपने में हमने देखा कि टॉम और जेरी धामी को घसीटते हुए हमारे घरमें वापस ला रहे है. धामी कहता जा रहा है कि, "जायका को मेरी वजह से इतनी तकलिफ उठानी पड़ रही है. मै यहां नहीं रहूंगा….वैसे मै जायका से बहुत प्यार करता हूं!"
...टॉम और जेरी धामी को हमारे पास ला कर सोफे पर हमारे पांव के पास बैठा रहे है...और धामी हमारे नर्म मुलायम पांव पर हाथ फेरता हुआ कुछ कह रहा है....
....और हमारी आंख खुल गई.सचमुच ही धामी हमारे पांव पर अपने होठ रखता हुआ," I love you,darling jayaka!!.." बार बार कहे जा रहा था.
...हम एकदम से उठकर बैठ गए.हमने अपने आप को चुंटी काट कर तसल्ली दी कि हम सपना नहीं देख रहे.सच में धामी हमारे घरमें, हमारे दिल में वापस लौट आया है. धामी की हमें और हमें धामी की सख्त ज़रुरत है. नामिका का खयाल इस समय हमारे दिल में आया ही नहीं. लगा कि दुनिया में एक ही मर्द है, धामी! ...और वह हमारे लिए ही दुनिया में आया है.
"धामी, तुम कहां चले गए थे?...तुम्हारी याद में हम आंसू बहाते हुए सो गए थे जानेमन! वो तो अच्छा हुआ कि हमारे दोस्त तुम्हें वापस यहां ले आए, वरना हमें दूसरा boyfriend ढूंढना पड़ता!..और पता नहीं, मिलता भी या नहीं!...I love you dhaami!...so much darling!" हम ने धामी के गले से लग कर फिर गंगा-जमना बहानी शुरु कर दी.
Monday, 10 March 2008
TOM AND JERRY SHOW Part 18
जायका के घर में...
‘TOM AND JERRY SHOW’-Part-18
हम अब खुश थे.हां! धामी ना आता और नामिका डब्बू को ले गई होती...तो हम शायद इस समय जेल की हवा खा रहे होते. ….नही समझे?
...सीधी सी बात है, हम ने नामिका पर जान लेवा धावा बोल दिया होता...नामिका ने तुरन्त 100 नंबर दबा दिया होता....पुलिस जीप समेत हमारे दरवाजे पहुंच गई होती...जीप दरवाजे पर ही खड़ी रहती...पुलिस अंदर आ गई होती...और हमारी एक भी सुने बगैर हमें हथकड़ियां पहना कर....जीप में बैठा कर ले गई होती. डब्बू की नींद तो तब भी कौन सी खुलने वाली थी!
...लेकिन ऐसा अगर कुछ नहीं हुआ तो, धामी की वजह से ही नहीं हुआ था. धामी हमारे सामने था...हमे एक गाना; जो ज्यादा पुराना नहीं है,याद हो आया और हम अपनी फटी तूती जैसी आवाज़ में धामी की आंखों में आखें डालकर गाने लगे....
"तू मेरे सामने, मै तेरे सामने...तूझे देखू कि प्यार करु?...
ये कैसे हो गया,तू मेरा हो गया,...कैसे मै एतबार करु?...."
....धामी भी अब हमें बाहों मे उठाने ही लगा था कि, न जाने TOM, JERRY और कमबख्त हमारा lovely, कहांसे यहां आ धमके और धामी की टांगों मे घुस कर, जोर लगा कर उसे नीचे गिरा दिया. हम तो देखते ही रह गए और तीनों जैसे आए थे, वैसे ही चले भी गए...
"धामी डियर!...ये क्या हो गया? तुम्हें कहीं चोट तो नहीं आई?" अब धामी की मिजाज पुरसी तो करनी ही थी. प्यार करने का आलम तो खत्म हो गया था. हम मन ही मन पता नहीं किस-किसको गालियां दिए जा रहे थे. सबसे ज्यादा गालियां तो नामिका के खाते में दर्ज हो रही थी.
"जायका!... अब मुझे यहां एक पल भी नहीं रहना! सारी मुसीबत की जड़ तो मै ही हूं. अच्छा भला नामिका के घर में सो रहा था. मुझे नींद में बकवास करने की क्या जरुरत आन पड़ी?...ना मै बकवास करता कि मुझे जायका के घर जाना है, ना नामिका मुझे यहां छोड़ने आती, ना डब्बू को वापस ले जाती, ना मै ऐसे गिर जाता...हाय! ….लगता है मेरी पांव की हडडी टूट गई है. अब जैसे भी हो मुझे चलना चाहिए!" कहते हुए धामी खड़ा हो गया और अकड़ कर चलता हुआ दरवाजे की तरफ जाने लगा.
"नहीं धामी! तुम अकड़ कर चल रहे हो!..मतलब कि तुम्हारे पांव की हडडी साबूत है, मतलब कि टूटी नहीं है...रुक जाओ धामी! हम तुमसे कितना प्यार करते है!" हम बोलते रह गए और धामी दरवाज़ा खोल कर बाहर निकल भी गया.
Wednesday, 5 March 2008
TOM AND JERRY SHOW Part 17
‘TOM AND JERRY SHOW’-Part-17
हम नामिका को खरी खोटी सुना ही रहे थे कि...न जाने कहां से TOM बिल्ला और JERRY चुहा वहां आ धमके और जोर लगाके हमें पीछे धकेल दिया. वो तो अच्छा हुआ कि हमारे पीछे धामी खड़ा था.... फट से आगे बढ कर उसने हमें कस कर पकड लिया और हम गिरने से बच गए.
..अगर हम फर्श पर गिर जाते तो कुछ भी हो सकता था....या तो हमारे कूल्हे की हडडी टूट जाती, या तो दांत टूट जाते अगर हम मुंह के बल गिरते, या तो टांग की हडडी टूट कर हमें व्हील चेर पर बैठा देती, या तो उलटे गिरते तो हमारे गोले....जाने भी दो; ऐसा कुछ भी होने से सिर्फ धामी की वजह से बच गया था.
..हमें गुस्सा तो TOM and JERRY पर आ ही रहा था...लेकिन धामी के मजबूत स्पर्श की वजह से थोडा सबसाइड हो गया था. धामी तो अब भी हमें पकड़े हुए था और नामिका सोए हुए डब्बू के होठों पर अपने होठ रख कर ना जाने क्या कर रही थी!...अब हमें ध्यान आया कि नामिका डब्बू को लेने आई है और हमने किसी भी हालत में डब्बू को उसे वापस करना नहीं है. हम फिर जंग के मूड में आ गए....
"नामिका!..यहां से अभी चुपचाप निकल जा; वरना...." हम ने बोलना शुरु किया.
" वरना क्या?.. अपनी जबान संभाल; वरना..." नामिका भी शुरु हो गई.अब वह डब्बू का हाथ पकड़े हुए थी.
...हम दोनो 'वरना','वरना' ...कहते रह गए और उधर TOM और JERRY ने हमारे पिल्ले Lovely के साथ मिल कर सोए हुए डब्बू को सिर और टांगो से पकड़ कर उठाया और लेकर....दरवाजे की तरफ भागे! नामिका भी उनके पीछे भागी...और सबने मिलकर सोए हुए डब्बू को नामिका की कार की पिछली सीट पर लिटाया.
....बस नामिका ने कार स्टार्ट की और TOM, JERRY और हमारे Lovely ने भी उसे 'बाय, बाय,...टा,टा' कर दिया.
हमने देखा..हमारे साथ खड़ा धामी हंस रहा था. उसने धीरेसे अपना मुंह हमारे कान से लगाते हुए कहा,
"jayaka darling, डब्बू गया तो जाने भी दो, मै हूं ना!"
....हम हारे हुए जुआरी की तरह खड़े थे. नामिका के साथ अगला दांव खेलने के लिए अपने आप को तैयार करते हुए हमने भी धामी के गाल पर चुंटी काटते हुए कहा,
" Yes dear ! तुम तो डब्बू से भी अच्छे हो!...उसकी तरह कुंभकर्ण तो नहीं हो!"
Friday, 22 February 2008
TOM AND JERRY SHOW-Part-16
'TOM AND JERRY SHOW'-Part-16
अब हम बुरी तरह से फंस चुके थे! अपने की घर में हमारे लिए सोने की कोई जगह बची नहीं थी। हम बार बार अंदर-बाहर किए जा रहे थे...कभी bed-room में तो कभी drowing-room में आ जा रहे थे। अब हमें पछतावा हो रहा था की कहाँ से इस डब्बू को उठा लाये? अच्छा भला नामिका के घरमें रह रहा था! हमारा कोई boy-friend नहीं था तो इसका मतलब यह तो नही की; कहीं से भी कचरा उठा कर के घर में घुसेडा जाए!
... एकदम से हमारे गेट पर कार रुकने की आवाज़ आई और हम इस समय ' कौन आया !' देखने के लिए खिड़की की तरफ भागे। अब तो रात के बारह बजने में तीन मिनट बाकी थे!
...अरे ये तो नामिका कार में से उतर रही है और साथ में धामी भी है... अरे उनके साथ तो TOM बिल्ला भी है!
' हे भगवान! क्या अब ये लोग भी सोने के लिए यहाँ आ धमके है?... दरवाजा खोलेगी मेरी जूती! '
....हम आराम से बैठे रहे और हमारी डोर-बेल बजती रही... 'डब्बू तो अब उठनेसे रहा ! ... हूं! अपने आप नामिका अपने लाव-लश्कर के साथ वापस चली जाएगी! हम क्यों खोले दरवाजा?'
..हम सोचते हुए खिड़की के पास खड़े ही थे की उधर दरवाज़ा खुल जाने की आवाज़ हमारे कानों से टकराई। हम हैरान रह गए की दरवाज़ा आख़िर खोला किसने?.... देखा तो दरवाज़ा JERRY चूहे ने खोला था। दरवाज़ा खुलते ही सबसे पहले TOM बिल्ला अंदर आ गया और JERRY उसका पीछा करता हुआ.... ये भागा और वो भागा...
" यहाँ क्या करने आई हो नामिका?... तुने ख़ुद तो डब्बू को हमें सौंप दिया था?" हम भी नामिका के ऊपर हाथ मारते हुए शुरू हो गए।
... नामिका ने हमारा हाथ हटाने की बिलकुल भी कोशिश नहीं की...उलटा अपना हाथ हमारे गोले पर प्यार से फेरती हुई बोली...
" जायका! ये धामी मेरे घर रहने तो आ गया ... सबकुछ करने-समेटने के बाद जब ये सो गया , तो नींद में बोलने लगा कि 'मै तो जायका के घर रहने की सोच कर आया था...नामिका के साथ बेचारा डब्बू रह जाता तो मेरा क्या बिगड जाता?...मैने उसे बेघर कर दिया, उसके पेट पर मैने लात मारी!' ये कहते हुए धामी रोने लगा ....और सच कहती हूँ जायका! मेरा भी ज़मीर जाग उठा कि मैने डब्बू को घर से निकाल कर अच्छा नहीं किया. अब मै डब्बू वापस लेने आई हूं"
" आई बड़ी डब्बू को लेने!... अब डब्बू नहीं मिलनेका क्या?" हमने नामिका के गोले परसे अपना हाथ हटाकर सोए हुए डब्बू के सीने पर रख दिया...
" डब्बू मेरा है, मैं इसे ले कर ही जाउंगी!" कहते हुए अब नामिका ने भी अपना हाथ हमारे गोले परसे हटा लिया।
" अब ये डब्बू हमारा है; कोई इसे हाथ तो लगाकर देखे!... हमारे जैसा बुरा कोई नही है हाँ!" हमने नामिका की गर्दन पर हाथ रखते हुए कह दिया....अब हमारी इज्जत का सवाल था!
Monday, 11 February 2008
TOM AND JERRY SHOW Part-15
'TOM AND JERRY SHOW'..Part-15
" जायका, तुम तो कह रही थी कि यहाँ JERRY जैसा उस्ताद चूहा अपनी चुहिया के साथ रंग-रेलियां मना रहा है...लेकिन कहाँ है वो?" डब्बू इधर-उधर देखता हुआ पूछ रहा था।
" अब देख डब्बू! अभी वह यहाँ नहीं है तो क्या हुआ? ...नामिका के टॉम बिल्ले को देख तो कैसे पिंजड़े में बंद कर के चला गया! अगर तेरी समझदानी थोड़ी और बड़ी होती तो इस बात को तू आसानी से समझ गया होता!" हमने भी गुस्से में आ कर बोल दिया।
" अब तो मै यहां हरगिज़ नहीं रहूंगा। समझदानी तो तेरी छोटी है जायका!...जो तुने टॉम को पिंजड़े से बाहर हकाल दिया. ...पर मुझे क्या? मै तो जा रहा हूं!" डब्बू ने अटैची उठाने का नाटक किया.
" डब्बू,माय डार्लिंग! तुम कहीं नहीं जाओगे. मुश्किलसे तो मिले हो...जैसे भी हो! मतलब बहुत ही इंटेलिजंट हो!" हमने कहा और डब्बू ने अटैची नीचे रख दी।
...अब हम सोने की तैयारी करने बेडरुम की तरफ चले...'अरे! यहां हमारे बेड़ पर जेरी सोया हुआ है, ख़र्राटे ले रहा है!'...और हम घबराकर जोर से चिल्लाए,
" डब्बू, डब्बू!...जल्दी अंदर बेड़रुम में आओ!"
मै यहीं ड्रॉइंगरुम मे ठीक हूं!" डब्बू ने वहीं से जवाब भेजा.
" अरे! मै सोने के लिए नहीं बुला रही बेवकूफ!...यहां आ कर देख तो लो, जेरी चूहा यहां मेरे बेड़ पर सोया हुआ है!"
" तो क्या हुआ?...उसे मत जगाओ! जायका, तू भी यहां आ कर ड्रॉइंगरुम में ही सो जा!... अब मुझे नींद आ रही है! गुड नाइट जायका! अब सुबह बात करेंगे!" डब्बू की आवाज आई।
... हमने ड्रॉइंगरुम में जा कर देखा...डब्बू अब सचनुच ही सो चुका था. नामिका ने हमें एक बार बताया था कि डब्बू एक बार सो गया तो कुछ भी करों...कितने भी नगाड़े बजाओ, वह छ्ह घंटों से पहले कभी नहीं उठता! अब ये सुबह ही उठने वाला था...हम बुरे फुंस गए थे। हमें ना तो राम ही मिला और ना तो माया ही मिली!
उधर हमारे बेड पर जेरी चुहा सोया हुआ था और इधर डब्बू हलवाई सोया हुआ था। अब हमें ये तय करना था कि बेडरुम में जा कर जेरी चुहे के साथ सोया जाए या यहीं इस डब्बू के साथ?
...'डब्बू तो अब यहीं रहने आ गया है, ऐसी जल्दी भी क्या है?...चलो बेडरुममें चलकर देखते है कि शायद जेरी के साथ सोया जा सके!' सोचते हुए हम बेडरुम में आ गए और जैसे ही बेड पर चढ्ने लगे...हमने देखा जेरी के साथ उसकी गर्ल-फ्रैंड भी सोई हुई है!
" हे भगवान, अब हम कहां सोएंगे?" हम ऊंची आवाज में बोल गए.
Saturday, 2 February 2008
TOM AND JERRY PART-14
'TOM AND JERRY SHOW'..Part-14
हम अब पैदल चलते हुए, डब्बू के साथ अपने घर तक पहुंच गए थे। हमारा Lovely भी हमारे साथ चलकर ही हमारे घर तक आ गया था। हमने बंद दरवाजा खोला और अंदर झाँक कर देखा...
... सन्नाटा था....जैसे डरावनी हिन्दी फिल्मों में होता है। रात के अब आठ बजने वाले थे और अंदर घुप अँधेरा था। हमने जैसे लाईट जलाई...जोर से 'म्याऊं ' की आवाज कानों से टकराई। अब हमें डरता हुआ देख कर डब्बू आगे बढ़ा और इधर-उधर देखने लगा। हम भी उसके पीछे पीछे ही चल रहे थे...Lovely पता नहीं कहाँ छिप गया था कमबख्त ! कुत्ते जैसी हरकत करता.... अरे जोर से भौकता तो हमें अच्छा भी लगता!...खैर! नया नया हमारे घर आया हुआ था और छोटा पिल्ला भी था...हमने उसे माफ़ कर दिया, कोई चारा था क्या?
" अरे ये क्या है? चूहे के पिंजड़े में बिल्ला?... अरे ये तो नामिका का 'TOM ' है।" हमने देखते ही बोल दिया।
" ठीक है; TOM है तो क्या हुआ?...इसे बिल्ला कहना ही ठीक है । नामिका का तो नाम भी इस घर में नहीं लिया जाना चाहिए.... क्या समझी जायका?" डब्बू ने हमें डांट लगाई। हमें गुस्सा भी आया ....पर सोचा गुस्सा करनेसे डब्बू घर छोड़ कर चला गया तो!... बड़ी मुश्किल से कोई लड़का हाथ लगा है। ....और डब्बू के चले जाने का पता अगर नामिका को चल गया तो... वो हमारी बेवकूफी पर ठहाकें भी लगा सकती है, ऐसा नहीं होना चाहिए!
" जायका! क्या सोच रही हो?...मेरी बात का बुरा मान गई क्या? ...मैं तो ऐसे ही...मुझे तो आदत है ज़रा ऊँचा बोलनेकी कि इस वजह से ..." डब्बू हमें समझाने के सूर में बोला और हमें पता चला कि अब डब्बू के रहने के लिए भी यही एक घर बचा है।
" नहीं डब्बू, हमें ज़रा भी बुरा नही लगा... तुम्हारी बात बिल्कुल सही है; अब इस घरमें नामिका का नाम गुंजना भी नहीं चाहिए। उसने चलो तुम्हारी insult कर दी....कोई बात नहीं, लेकिन हमारी तो ना करती!" हमने कहा और डब्बू की शकल देख कर लगा कि हम कुछ ग़लत कह गए थे। ...पर डब्बू ने बुरा नहीं माना और हमारे kitchan की तरफ गया....
Kitchan में आज हमारा milk का पतीला भरा हुआ था। 'JERRY ' ने आज हमारा मिल्क पिया नहीं था. मगर JERRY कहीं नजर नहीं आ रहा था.
" डब्बू, क्या हम TOM को पिंजड़े में से बाहर निकल दें?" हमने डब्बू से पूछा , ....पर उसके कुछ कहने से पहले बाहर निकाल भी दिया।
....आज हम बहुत खुश थे।हमें बेवकूफ समझने वाली नामिका का मंगेतर आज हमारे घर पर रहने के लिए आ चुका था.
Sunday, 27 January 2008
'TOM AND JERRY ShOW' Part-13
'TOM AND JERRY SHOW'..Part-13
नामिका की नज़र सबसे पहले मेरे उपर ही पड़ी. वह लाल लाल आंखों से मुझे घुर ही रही थी कि मेरा पिल्ला 'Lovely' डायनिंग टेबल से एकदम से कूद कर मेरे उपर आ गिरा। मैने उसे अपने दो हाथों मे संभालते हुए कहा...
" Lovely, अब तुम खाना खा चुके हो...चलो अब घर चलतें है!" कहते हुए उसे मै दुलारने लगी.यह् देख कर नामिका की आंखों की लाली कुछ कम हो गई, समझा लो कि गुलाबी हो गई....
"तुम यहां क्या कर रही हो जायका?...तुम्हें तो इस समय अपने घर पर होना चाहिए...तुम्हारे घर पर तो' TOM AND JERRY SHOW ' चल रहा है..."नामिका ने हैरानी से मेरी तरफ देखे हुए पूछा।
नामिका का मोर्चा मेरी तरफ है...इस मौके का फायदा उठा कर डब्बू ने कांच की टूटी हुई प्लेट के टूकडे उठा कर डस्टबिन में फेंक दिए और डायनिंग टेबल भी कपड़े से साफ कर दिया. वाकई डब्बू एक कुशल रसोईया था. मै मन ही मन सोचने लगी' काश! कि डब्बू को मै अपने Lovely के साथ अपने घर पर रख सकू!'
" क्या बात है जायका?...क्या सोच रही हो? मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया अब तक!" नामिका अब तक कुर्सी अपनी तरफ खिंच कर, डायनिंग टेबल पर एक हाथ रख कर बैठ भी गई थी.
" हम क्या कर रहे है यहां?..अरे वाह! हम तो जानेमन,...तेरी ही राह देखते हुए कबसे यहां समय गुज़ार रहे है. क्या अब घर जाया जाए?..." मैने अपनी रिस्टवॉच में नज़र गड़ाई...वैसे तिरछी नज़र तो डब्बू के चेहरे पर ही टिकी हुई थी.
"नहीं...लेकिन क्या तू डर रही है जायका?" नामिका ने पूछा.
..यहां अगर हम चूहों से डरने लगे तो हो गई छुट्टी! लेकिन अब 'डर रहे है' यह दिखाना भी तो लाजमी था...नहीं तो गडबड भी हो सकती थी.
" मुझे तो सचमुच ही डर लग रहा है. क्या तू मेरे साथ नहीं चल रही! खैर!उस धामी का ही मोबाईल नंबर दे दे मुझे! उसे अपने साथ अपने घर ले चलूँ!" कहते हुए हमने पर्स में से अपना मोबाईल बाहर निकाला।
" अहं जायका! मेरा काम बन गया!...धामी तो अब यहां मेरे साथ रहने आ रहा है. वह मोटवानी के घर अपना सामान लेने गया है. थोड़ी देर में पहुंचने वाला ही होगा. मुझे तो डब्बू की चिंता थी कि वह कहां जाएगा?..अब तू ऐसे कर डब्बू को अपने साथ अपने घर ले जा...क्यों डब्बू?...कैसा इंतज़ाम है?"नामिका ने टेबल पर पड़ा हुआ पानी का गिलास उठा कर मुंह से लगाया.पानी मेरे 'Lovely' का जूठा था....लेकिन पानी तो नामिका गटक गई थी। मै और डब्बू अब एक दूसरे की शकल देख रहे थे.
" ठीक है; मैं जायका के घर चला जाता हूं...अब वापस तेरे यहां कभी नहीं आऊँगा!...by, by नामिका !" कहते हुए डब्बू ने अपनी अटैची उठा ली और हमारा हाथ पकड़ कर हमें घसीटता हुआ दरवाजे से बाहर आ गया।
"रुको भाई! इतनी जल्दी भी क्या है?... मै कार में छोड़ आती हूं तुम दोनों को!..." नामिका हमारे पीछे पीछे आ रही थी।
" नहीं! हम पैदल ही चले जाएंगे!..क्यों जायका?"...डब्बू अब एक मर्द की भाषा बोल रहा था; जो हमें बेहद पसंद थी!