बात छोटीसी होती है...उसका बतंगड बना कर उसे बडी बनाई जा सकती है।...जैसे कि गुब्बारा...और राई का पहाड!
Wednesday, 11 May 2011
Thursday, 5 May 2011
लंदन और आसपास की जगहें...
लंदन और आसपास के इलाकों के बारे में ..जानकारी चाहिए!
मैं अगले महीने जून में लंदन जाने का प्रोग्राम बना रही हूँ!...किसी पॅकेज टूर के अंतर्गत जाने की सोच रही हूँ!...मैं और मेरे हसबंड..दोनों ही यूरोप घुमने का प्रोग्राम बना रहे है!...क्या पॅकेज टूर इंडिया से ले कर जाना ठीक रहेगा या लंदन जा कर वहां से लेना ठीक रहेगा? ...लंदन में मेरे जेठजी के यहां चार-पांच दिन रहने का प्रोग्राम भी है!...क्या लंदन से पॅकेज टूर ले कर जर्मनी में प्रोग्राम की समाप्ति हो ऐसे भी पॅकेज मिल सकते है ?....जर्मनी में मैं अपनी बिटिया के यहां दो महीने रह कर इंडिया वापस आना चाहती हूं!...अगर पॅकेज टूर प्रोवाइड करने वाली ऐसी कोई कंपनी का नाम और फोन नंबर अगर मुझे मिल सकता है तो...आभारी रहूंगी!..लंदन निवासी ब्लोगर साथियों से मिलने की भी मेरी दिली इच्छा है... जर्मनी में श्री.राज भाटिया जी से भी मिलना चाहूंगी!...
...आप से अनुरोध है कि कृपया मेरा मार्ग-दर्शन करें!...
...यह जानकारी मैं समझती हूं कि सभी के लिए उपयुक्त रहेगी!
मैं अगले महीने जून में लंदन जाने का प्रोग्राम बना रही हूँ!...किसी पॅकेज टूर के अंतर्गत जाने की सोच रही हूँ!...मैं और मेरे हसबंड..दोनों ही यूरोप घुमने का प्रोग्राम बना रहे है!...क्या पॅकेज टूर इंडिया से ले कर जाना ठीक रहेगा या लंदन जा कर वहां से लेना ठीक रहेगा? ...लंदन में मेरे जेठजी के यहां चार-पांच दिन रहने का प्रोग्राम भी है!...क्या लंदन से पॅकेज टूर ले कर जर्मनी में प्रोग्राम की समाप्ति हो ऐसे भी पॅकेज मिल सकते है ?....जर्मनी में मैं अपनी बिटिया के यहां दो महीने रह कर इंडिया वापस आना चाहती हूं!...अगर पॅकेज टूर प्रोवाइड करने वाली ऐसी कोई कंपनी का नाम और फोन नंबर अगर मुझे मिल सकता है तो...आभारी रहूंगी!..लंदन निवासी ब्लोगर साथियों से मिलने की भी मेरी दिली इच्छा है... जर्मनी में श्री.राज भाटिया जी से भी मिलना चाहूंगी!...
...आप से अनुरोध है कि कृपया मेरा मार्ग-दर्शन करें!...
...यह जानकारी मैं समझती हूं कि सभी के लिए उपयुक्त रहेगी!
Friday, 29 April 2011
खटक रही है कुछ कमी...
आखिर हमने कह डाला...
क्या कहें?...
या फिर कुछ भी न कहें?
या फिर चुप ही रहे?....
यारो! ...आप ही बताएं....
आप की चुपकी को ...
आप की 'हाँ ' समझतें है....
ना..ना...करते हुए भी....
चलिए!...हम कुछ कहतें है......
चर्चा मंच पर गए थे हम....
पता चला एक समारोह का...
पता चला कुछ....
सन्मानित होने वाले...
ब्लॉगर साथियों का.....
इक्यावन नाम पढ़ लिए हमने.....
एक नहीं....ग्यारह बार पढ़े हमने....
क्या बताएं....
कुछ गले में अटक सा गया...
कुछ नाम और जुड़ने चाहिए थे...
ऐसा हमें रह रह कर लगा....
याद आए राज भाटियाजी...
वे नदारद थे लिस्ट में से....
मनोरंजन से भरपूर....
जिनकी हर पोस्ट पाई है हमने....
उनका 'तिलियार लेक 'वाला मेला ...
यार लोग कैसे भूल गए?...
हास्य कवि अलबेलाजी....
लिस्ट में अगर होते....
हास्य की तरंगे ...
पैदा हो जाती आप सुक.....
उन्हें देखने सुनने वाले...
हास्य-रंग में रंग जाते.....
न संजय भास्कर मुस्कुराएँ इस लिस्ट में....
न 'झील' को समझा गया इस काबिल....
ताउजी, ताउजी कहते हुए कहकहे लगाने वाले...
कैसे भूल गए...उस रामपुरिया ताऊ को...
जिसने इतनी भावपूर्ण रचनाएं प्रस्तुत की...
कैसे भूल गए उस वन्दना को....
आशा जोगलेकर भी है...
बला की कवियित्री ......
यात्रा वृत्तान्त भी बहुत से दिए है इसने...
हिन्दी और मराठी ब्लोगिंग में.....
बहुत बड़ा योगदान है, इसका भी तो....
क्यों नाम नहीं है इसका लिस्ट में...
डॉ.नूतन 'नीति' ने भी यहाँ...
जीता है हम सबका मन.....
इसके नाम का भी देखिए....
नहीं हुआ है चयन....
रचना दीक्षित को भी साथियों...
क्यों भुलाया गया?....
यही सब सोच सोच कर....
हमारा सिर घूम गया.....
लिस्ट में हमें....
कुछ ऐसे नाम मिलें...
जो अनजान थे हम सबसे...
चाहे सुनने में कितने ही हो भले...
हाँ!...अगर सन्मानित करना था....
सिर्फ इक्यावन नामों को...
तो भी मुश्किल तो कुछ भी न था....
ब्लोगिंग में योगदान देने वाले....
अथाग मेहनत करने वाले....
कुछ नयापन पेश करने वाले....
झुझारू, कर्मठ और लायक...
ब्लॉगरों का चयन जरुरी था...
झुझारू कर्मठ और लायक...
कुछ नया कर दिखाने वाले...और मेहनतू
ब्लॉगर है इस लिस्ट में....
इनकार नहीं है हमें...
बल्कि..बहुत खुशी है हमें....
उन सबको बहुत बहुत बधाई....
कल ३० एप्रिल को है ब्लॉगर संमेलन....
ब्लोगर मिलन की सुमधुर घड़ी आई....
चाहते है हम कारवाँ यूँ ही चलता रहे....
नए..पुराने साथी...साथ मिल कर यूँ ही....
ब्लॉग जगत का सुहाना सफ़र ....
मस्त बन कर तय करते रहे...
क्या कहें?...
या फिर कुछ भी न कहें?
या फिर चुप ही रहे?....
यारो! ...आप ही बताएं....
आप की चुपकी को ...
आप की 'हाँ ' समझतें है....
ना..ना...करते हुए भी....
चलिए!...हम कुछ कहतें है......
चर्चा मंच पर गए थे हम....
पता चला एक समारोह का...
पता चला कुछ....
सन्मानित होने वाले...
ब्लॉगर साथियों का.....
इक्यावन नाम पढ़ लिए हमने.....
एक नहीं....ग्यारह बार पढ़े हमने....
क्या बताएं....
कुछ गले में अटक सा गया...
कुछ नाम और जुड़ने चाहिए थे...
ऐसा हमें रह रह कर लगा....
याद आए राज भाटियाजी...
वे नदारद थे लिस्ट में से....
मनोरंजन से भरपूर....
जिनकी हर पोस्ट पाई है हमने....
उनका 'तिलियार लेक 'वाला मेला ...
यार लोग कैसे भूल गए?...
हास्य कवि अलबेलाजी....
लिस्ट में अगर होते....
हास्य की तरंगे ...
पैदा हो जाती आप सुक.....
उन्हें देखने सुनने वाले...
हास्य-रंग में रंग जाते.....
न संजय भास्कर मुस्कुराएँ इस लिस्ट में....
न 'झील' को समझा गया इस काबिल....
ताउजी, ताउजी कहते हुए कहकहे लगाने वाले...
कैसे भूल गए...उस रामपुरिया ताऊ को...
जिसने इतनी भावपूर्ण रचनाएं प्रस्तुत की...
कैसे भूल गए उस वन्दना को....
आशा जोगलेकर भी है...
बला की कवियित्री ......
यात्रा वृत्तान्त भी बहुत से दिए है इसने...
हिन्दी और मराठी ब्लोगिंग में.....
बहुत बड़ा योगदान है, इसका भी तो....
क्यों नाम नहीं है इसका लिस्ट में...
डॉ.नूतन 'नीति' ने भी यहाँ...
जीता है हम सबका मन.....
इसके नाम का भी देखिए....
नहीं हुआ है चयन....
रचना दीक्षित को भी साथियों...
क्यों भुलाया गया?....
यही सब सोच सोच कर....
हमारा सिर घूम गया.....
लिस्ट में हमें....
कुछ ऐसे नाम मिलें...
जो अनजान थे हम सबसे...
चाहे सुनने में कितने ही हो भले...
हाँ!...अगर सन्मानित करना था....
सिर्फ इक्यावन नामों को...
तो भी मुश्किल तो कुछ भी न था....
ब्लोगिंग में योगदान देने वाले....
अथाग मेहनत करने वाले....
कुछ नयापन पेश करने वाले....
झुझारू, कर्मठ और लायक...
ब्लॉगरों का चयन जरुरी था...
झुझारू कर्मठ और लायक...
कुछ नया कर दिखाने वाले...और मेहनतू
ब्लॉगर है इस लिस्ट में....
इनकार नहीं है हमें...
बल्कि..बहुत खुशी है हमें....
उन सबको बहुत बहुत बधाई....
कल ३० एप्रिल को है ब्लॉगर संमेलन....
ब्लोगर मिलन की सुमधुर घड़ी आई....
चाहते है हम कारवाँ यूँ ही चलता रहे....
नए..पुराने साथी...साथ मिल कर यूँ ही....
ब्लॉग जगत का सुहाना सफ़र ....
मस्त बन कर तय करते रहे...
Monday, 4 April 2011
...स्त्रियों पर होने वाले अत्याचारों की कहानी?
एक सीरियल'..ना आना इस देश मेरी लाडो!'
... सीरियल का नाम है..'ना आना इस देश मेरी लाडो..' ...जो मैं लगभग देढ साल से देख रही हूं!...क्या खूब नाम चुन कर रखा गया है सीरियल का!...कलर्स चैनल पर प्रतिदिन रात साढ़े दस बजे प्रसारित हो रहा है...शनीवार और रविवार अवकाश रहता है!
....इस सीरियल की शुरुआत में ही लिखा हुआ आता है कि यह किसी ख़ास परिवेश, धर्मं या जाति से संबंधित नहीं है ..इसमें स्त्रियों पर हो रहे अत्याचारों को ही दिखाया जा रहा है...वगैरा, वगैरा!
....जब से मैं देख रही रही हूं...इस सीरियल की कहानी एक 'भगवानी ' नाम की एक 'जालिम' महिला के इर्द-गिर्द ही घूम रही है!..विधवा है...पैसेवाली है,....यह अम्माजी के नाम से सर्वत्र जानी जाती है!....इसके तीन बेटे है...तीन बहुएं भी है!...नौकर, चाकर, देवर देवरानी और उनका बेटा और बेटी भी है!...भरा पूरा परिवार है!
....यही अम्माजी औरतों पर पूरजोर अत्याचार किए जा रही है!
...बहूएँ तो इसके नाम से कांप उठती है!...देवरानी की बेटी को घर में नौकरानी बना कर रखा हुआ है ..क्यों कि वह स्त्री है !..सबसे छोटे बेटे राघव की पत्नी सिया नई विचार धारा की है...सिया और राघव का प्रेम-विवाह है!...अम्माजी से वही सबसे ज्यादा प्रताड़ित होती दिखाई है!..घर में उसका बहुत बुरा हाल है!
...कहानी आगे बढ़ती है ...अम्माजी, देवरानी की बेटी की और उसकी सहेली की इसलिए हत्या करवाती है...क्यों कि वे दोनों सगोत्र के लड़कों से शादी करना चाहती थी!..लडकों की भी अम्माजी हत्या करवा देती है...कहानी की कमजोरी तो देखिए कि अम्माजी पर कोर्ट में केस भी चलता है पर वह निर्दोष छूट जाती है!
...आगे चल कर पता चलता है कि अम्माजी ने अपनी बेटी पैदा होने पर उसका त्याग कर दिया था...वही बेटी डाकू 'अंबा' बन कर अम्माजी से टक्कर लेती है...वाह भाई वाह!....इस समय अच्छा लगता है कि अम्माजी को मात मिलने वाली है...लेकिन अफ़सोस कि नहीं मिलती!...
.....अम्माजी की बहू 'सिया' जब जुडवा बेटियों को जन्म देती है..तब अम्माजी उन बेटियों को जान से मार डालने के लिए कई हथकंडे अपनाती है...लेकिन कामियाब नहीं होती!...न हुई तो क्या हुआ?....बेटियों को बचाने की कोशिश में बहू' सिया' मृत्यु के मुख में चली जाती है!...और अपनी पत्नी और बेटियों को बचाने वाला अम्माजी का बेटा राघव भी मृत्यु को प्राप्त हो जाता है...खैर ..दोनों बेटियां बच जाती है! ...एक बेटी 'दीया'अम्माजी के यहां पल रही है और दूसरी बेटी' जिया' अंबा पाल रही है!
....समय आगे बढ़ता है..अम्माजी अब गांव से दिल्ली आ चुकी है...यहां भी ठाठबाठ से रह रही है...कमाई का जरिया तो बेईमानी ही है!...अम्माजी की बेटी अंबा भी अब डकैती का काम छोड़ कर दिल्ली आ कर बस गई है!..वह शादियों के प्रबंधन का काम कर रही है!...इसकी भी कमाई अच्छी हो रही है!..अम्माजी और अंबा ..एक दूसरी के बारे में कुछ भी जानती नहीं है!..कहानी को आगे बढाने के लिए यह भी जरुरी था!
....अम्माजी के बेटे गलत काम में शुरू से ही साथ देते आए है...बेटा गजेन्द्र और जोगेंद्र अम्माजी के कहने पर और अपनी इच्छा से भी कई हत्याए कर चुके है ...नौकर 'यशपाल' भी खूंखार भेड़िए जैसा है...यह अम्माजी के इशारों पर अब तक कई खून कर चुका है...क़ानून की गिरफ्त में अब तक अम्माजी का कोई भी मोहरा नहीं फंसा है.... कहानी लेखक को बधाई!
...इधर अम्माजी के बेटे गजेन्द्र के बेटे ..याने कि अम्माजी के पोते की शादी अमेरिका निवासी लडकी से होने जा रही है...लेकिन अम्माजी की मरजी के खिलाफ कैसे हो सकती है?..अम्माजी बहुत अकलमंद तो है ही ...अब तक तो अक्ल का इस्तेमाल करके ही सैकड़ों अपराध कर चुकी है!...वह ऐसी चाल चलती है कि लडकी ही ऐन शादी के फेरों के समय शादी करने से इनकार कर देती है और अमेरिका वापस चली जाती है!...अम्माजी जो चाहती थी वही होता है!...लेखक को फिर एक बार बधाई देने का मन कर रहा है!..जय हो अम्माजी की!
...लेकिन शादी का प्रबंधन संजोग से ( ...ऐसे संजोग तो कहानियों में आते ही है ) अंबा के हाथ में है...इस वजह से अंबा के घर पल रही राघव और सिया की बेटी 'जिया ' इस शादी में उपस्थित है...वैसे भी वह अपनी जुडवा बहन 'दीया' की सहेली भी है...दोनों एक ही कोलेज और कक्षा में पढ़ रही है!...लेकिन असलियत जानती नहीं है!
....शादी के प्रबंधन के लिए एक युवा लडकी 'नेहा' भी कार्यभार संभाल रही है!..उस पर अम्म्माजी के पोते यानी कि देवर के बेटे की बुरी नजर है
...कहानी में अब गांठे लगाने का काम लेखक ने आरंभ कर दिया है!... .
..तो होता यह पोता 'नेहा' को बस में करने कि कोशिश करता है...लेकिन उसके हाथो इस बुरे काम को अंजाम देते वक्त 'नेहा' कि ह्त्या हो जाती है!...अम्माजी अब पोते को कानूनी शिकंजे से बचाने के दावपेच खेलती है!....देवर का बेटा हुआ तो क्या हुआ...उसका पुरुष होना और अम्माजी के खानदान से होना ही काफी है!....'दिया' ने खून होते हुए अपनी आँखों से देखा है.. तो इस दरमियान 'दिया' की गवाही अहम् होती है!...लेकिन दिया को कोर्ट जाने से रोकने के लिए अम्माजी गुंडे -बदमाश भेजती है !
...बहुत लड़ाई झगड़े और खून खराबा इस समय दिखाया गया है....और दिया को बचाते हुए अम्माजी की बेटी 'अंबा' जान गवां बैठती है!...बहुत ही दारुण प्रसंग दिखाया गया है!
....यह है इस सीरियल की अबतक की कहानी!...स्त्रियों पर होने वाला अत्याचारों की पराकाष्ठा जरुर दिखाई गई है...लेकिन क्या सही में हमारा समाज ऐसा है?.....क्या अम्माजी जैसी स्त्रियों का समाज में अस्तित्व है?...अगर अपराधी प्रवृत्ति की स्त्रिया हमारे समाज में है, तो क्या क़ानून उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता?....क्या इस सीरियल को दिखा कर लेखक और टी.वी. चैनल वाले यही कहना चाहते है कि यह सब हंमेशा के लिए ऐसे ही चलता रहेगा? ...इसमे कभी कोई बदलाव आएगा ही नहीं?
...अगर आगे की कहानी में भी अम्माजी कत्लेआम करती ही जाएगी तो औरतों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों को दिखाने की क्या जरुरत है?
...सीरियल के सभी कलाकार अपनी अपनी भूमिका के लिए अच्छे है!
.....महेन्द्र सिंह धोनी की क्रिकेट टीम ,भारत का दुनिया में डंका बजा चुकी है...क्रिकेट का 'वर्ल्ड कप ' हमारा हो चुका है!...चारों तरफ खुशियों के परचम लहरा रहे है....ऐसे में नया संवत्सर अपने पावन कदम रख चुका है!...सभी को नवरात्री की ढेरों शुभ-कामनाएं!
Saturday, 19 March 2011
होली आई...होली गई!
...मेरी होली मजेदार रही...और आपकी?
रंगों के बहाने रंगीन सपने...
चित्रित करने आती है होली....
रूठो को मनाने का मौका...
हमें दे जाती है होली....
कुछ भी कह दो, कुछ भी बोलो...
गाली भी लगती है भली...
गुजराती,पंजाबी, मराठी नहीं...
यहाँ मजाक की चलती है बोली...
ढोल.ताशे, मृदंग की थाप पर...
हमें खूब नचाती है होली....
....क्या कहने!...बहुत अच्छा त्यौहार है....खुशी खुशी मनाओ !...और हमने मनाई होली!...मैंने करीबन दस साल के अंतराल के बाद समाज के साथ घुल मिल कर मैंने होली मनाई! बहुत अच्छा अनुभव रहा!
...इस बार समाज में आए हुए बहुत बड़े परिवर्तन को देखा!..होली पक्के और हानिकारक रंगों से नहीं खेली जाती!...और यह देख कर खेली जाती है कि सामने वाला रंग खेलने की मानसिकता लिए हुए है या नही!...कोई अभद्र व्यवहार किसीके साथ नहीं करता... कोई अपशब्दों का प्रयोग भी नहीं करता........मैंने यही सब देखा और लगा कि समाज में वाकई कितना परिवर्तन आ चुका है!...
...दस साल पहले की ऐसी ही होली ने रंगों को बदरंग कर डाला था और आपस के झगड़ो की वजह से पुलिस तक हमारी सोसायटी में बुलाई गई थी!...होली का हूड्दंग आफत बन गया था!
....वैसे हर त्यौहार का अपना एक अलग महत्त्व है...एक अलग कहानी है!...लेकिन खुशी तो हर हर त्यौहार अपने साथ ले कर आता ही है!...होली की मेरे सभी ब्लौगर मित्रों को तहे दिल से बधाई!...सभी ने होली का मजा लूटा ही होगा!
....मैं अपनी उम्र की बात करूं तो यह ६०+ चल रही है!...प्लस कितना करना है, यह मैं आप पर छोड़ देती हूं ....क्यों कि मैं मानती हूँ कि जब तक मेरा दाहिना हाथ कलम चलाता रहेगा मेरी उम्र ६० ही वर्ष की रहेगी और जिस दिन हाथ कलम को छोड़ देगा उस दिन मेरे १०० साल पूरे जाएंगे! जीवन की गाडी अपनी रफ़्तार से चल रही है!
चन्द्र धरती के पास आ रहा है...अब तक फिर दूर जाने की राह पर होगा!...जापान तबाह हो चुका है...पता नही इसका जिम्मेदार चाँद है या नहीं!..कोई 'ना' कह रहा है!...कोई 'हाँ' कह रहा है ...और भी तबाही की आशंकाए जताई जा रही है!
...तो चलिए ,देखें की आगे क्या परोसा जाने वाला है!
अब फिर अपनी बात कहूं तो ....एक नॉवल लिख चुकी हूं...उनकी नजर है हम पर... दूसरा भी लिख चुकी हूं ..लेकिन अभी उसे छपवाने की जल्दी मुझे नहीं है!..लगता है हर काम अपने समय पर खुद- ब-खुद हो जाता है!...हां! प्रतियोगिताओं में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना मेरा बचपन का शौक है ..जो अब तक जारी है!...फिर वह कविता लिखने की प्रतियोगिता हो, कहानी प्रतियोगिता हो, निबंध हो ...या कोई अन्य हो!...बहुत बार जीतने की खुशी मुझे मिली है और हारने की भी मिली है!..जी हां!...मैं हार को भी खुशी मान कर ही गले लगाती हूँ!
....चलिए फिलहाल तो आप सभी होली कैसी मनाई जाए...इस पर विचार विमर्श कर रहे होंगे!..और मुझे पता है कि कुछ ज्यादा स्मार्ट ब्लोगर्स होली मनाने से पहले ही...हमने ऐसे मनाई होली...कहकर मनगढ़ंत कहानी लिखने में मस्त हो गए होंगे!...माफ़ करना मनगढ़ंत कहानिया मैंने भी लिखी है....तो मेरा ऐसा सोचना जायज है कि नहीं?
...तो एक बार फिर ..आप सभी को होली मुबारक हो....
चित्रित करने आती है होली....
रूठो को मनाने का मौका...
हमें दे जाती है होली....
कुछ भी कह दो, कुछ भी बोलो...
गाली भी लगती है भली...
गुजराती,पंजाबी, मराठी नहीं...
यहाँ मजाक की चलती है बोली...
ढोल.ताशे, मृदंग की थाप पर...
हमें खूब नचाती है होली....
....क्या कहने!...बहुत अच्छा त्यौहार है....खुशी खुशी मनाओ !...और हमने मनाई होली!...मैंने करीबन दस साल के अंतराल के बाद समाज के साथ घुल मिल कर मैंने होली मनाई! बहुत अच्छा अनुभव रहा!
...इस बार समाज में आए हुए बहुत बड़े परिवर्तन को देखा!..होली पक्के और हानिकारक रंगों से नहीं खेली जाती!...और यह देख कर खेली जाती है कि सामने वाला रंग खेलने की मानसिकता लिए हुए है या नही!...कोई अभद्र व्यवहार किसीके साथ नहीं करता... कोई अपशब्दों का प्रयोग भी नहीं करता........मैंने यही सब देखा और लगा कि समाज में वाकई कितना परिवर्तन आ चुका है!...
...दस साल पहले की ऐसी ही होली ने रंगों को बदरंग कर डाला था और आपस के झगड़ो की वजह से पुलिस तक हमारी सोसायटी में बुलाई गई थी!...होली का हूड्दंग आफत बन गया था!
....वैसे हर त्यौहार का अपना एक अलग महत्त्व है...एक अलग कहानी है!...लेकिन खुशी तो हर हर त्यौहार अपने साथ ले कर आता ही है!...होली की मेरे सभी ब्लौगर मित्रों को तहे दिल से बधाई!...सभी ने होली का मजा लूटा ही होगा!
....मैं अपनी उम्र की बात करूं तो यह ६०+ चल रही है!...प्लस कितना करना है, यह मैं आप पर छोड़ देती हूं ....क्यों कि मैं मानती हूँ कि जब तक मेरा दाहिना हाथ कलम चलाता रहेगा मेरी उम्र ६० ही वर्ष की रहेगी और जिस दिन हाथ कलम को छोड़ देगा उस दिन मेरे १०० साल पूरे जाएंगे! जीवन की गाडी अपनी रफ़्तार से चल रही है!
चन्द्र धरती के पास आ रहा है...अब तक फिर दूर जाने की राह पर होगा!...जापान तबाह हो चुका है...पता नही इसका जिम्मेदार चाँद है या नहीं!..कोई 'ना' कह रहा है!...कोई 'हाँ' कह रहा है ...और भी तबाही की आशंकाए जताई जा रही है!
...तो चलिए ,देखें की आगे क्या परोसा जाने वाला है!
अब फिर अपनी बात कहूं तो ....एक नॉवल लिख चुकी हूं...उनकी नजर है हम पर... दूसरा भी लिख चुकी हूं ..लेकिन अभी उसे छपवाने की जल्दी मुझे नहीं है!..लगता है हर काम अपने समय पर खुद- ब-खुद हो जाता है!...हां! प्रतियोगिताओं में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना मेरा बचपन का शौक है ..जो अब तक जारी है!...फिर वह कविता लिखने की प्रतियोगिता हो, कहानी प्रतियोगिता हो, निबंध हो ...या कोई अन्य हो!...बहुत बार जीतने की खुशी मुझे मिली है और हारने की भी मिली है!..जी हां!...मैं हार को भी खुशी मान कर ही गले लगाती हूँ!
....चलिए फिलहाल तो आप सभी होली कैसी मनाई जाए...इस पर विचार विमर्श कर रहे होंगे!..और मुझे पता है कि कुछ ज्यादा स्मार्ट ब्लोगर्स होली मनाने से पहले ही...हमने ऐसे मनाई होली...कहकर मनगढ़ंत कहानी लिखने में मस्त हो गए होंगे!...माफ़ करना मनगढ़ंत कहानिया मैंने भी लिखी है....तो मेरा ऐसा सोचना जायज है कि नहीं?
...तो एक बार फिर ..आप सभी को होली मुबारक हो....
Thursday, 25 November 2010
अलबेला जी की हास्य-व्यंग्य प्रतियोगिता में भाग लें!
अलबेला खत्री जी की हास्य-व्यंग्य प्रतियोगिता हाजिर है!
श्री. अलबेला खत्री जी हास्य कवि है ...लेकिन सिर्फ कविता के माध्यम से ही नहीं... बातों का बतंगड़ बना कर भी हंसाने में ये कवि महाशय माहिर है!...मैंने हाल ही में तिलियार ब्लोगर मेले में इनके द्वारा प्रसारित हास्य की फुआर उडती देखी!....वैसे इन्हों ने, कहते है कि वहां हास्य की गंगा भी बहाई थी.... लेकिन ये साहब जब वहां पहुंचें... लेट ही पहुंचे....तब हम ( मतलब कि मैं और मेरे पति पृथ्वीराज कपूर ) वापसी की ही तैयारी कर रहे थे!...फिर भी आधा घंटा और ठहर गए और इनके सानिंध्य का आनंद उठा ही लिया!... तब बात छिड़ गई थी इनके साथ हुए राखी सावंत की भिडंत की!...हा, हा, हा...
...राखी सावंत के तेवर तो टी.वी.चेनलों का गरम मसाला है ही ! ...लेकिन राखी सावंत को भी अलाबेलाजी ने तीखी हरी मिर्चे चटा दी...सुन कर वहा बैठे सभी वाह वाह कर उठे !...ब्लोगर मेले की असली आप-बिती तो अब राज भाटियाजी सुनाने वाले है!...इन्होने ही इस मेले का भार अपने कंधे पर या कंधों पर उठाया था!....हा, हा, हा!
ताजा समाचार मैं यहाँ दे रही हूँ कि अलबेला खत्री जी ...स्पर्धा क्रमांक -5 का ...हास्य-व्यंग्य प्रतियोगिता का ....आयोजन करने जा रहे है... जैसे कि 1,2,3 और 4 का कर चुके है!...इस बार उनका कहना है कि हास्य-व्यंग्य प्रतियोगियों द्वारा प्रस्तुत किए जाने चाहिए...मतलब कि हंसाने की जिम्मेदारी हम ब्लोगर्स की है...और हंसने की जिम्मेदारी उनकी है!......चाहे कविता हो, गजल हो,लेख हो, कहानी हो, निबंध हो, कार्टून हो ....कुछ भी चलेगा, लेकिन हँसाने में सक्षम होना जरुरी है!....अलबेला जी जरुर हसेंगे ...आप इस स्पर्धा में भाग ले कर तो देखिए...हा, हा, हा!
...एक प्रतियोगी एक ही रचना भेज सकता है! ....रचना भेजने कि अंतिम तारीख 15 दिसंबर है!... इनाम भी देने के लिए उन्होंने तैयार रखे हुए है!...तो Albelakhatri.com पर फ़ौरन दौड़ लगाइए और अपनी क्षमता का परिचय सभी को दीजिये!...हां, हा, हां!
...अगर यह खबर पढ़ कर हंसी आ जाए तो मेरे साथ बेशक ठहाका लगा सकतें है....हा, हा, हा!
श्री. अलबेला खत्री जी हास्य कवि है ...लेकिन सिर्फ कविता के माध्यम से ही नहीं... बातों का बतंगड़ बना कर भी हंसाने में ये कवि महाशय माहिर है!...मैंने हाल ही में तिलियार ब्लोगर मेले में इनके द्वारा प्रसारित हास्य की फुआर उडती देखी!....वैसे इन्हों ने, कहते है कि वहां हास्य की गंगा भी बहाई थी.... लेकिन ये साहब जब वहां पहुंचें... लेट ही पहुंचे....तब हम ( मतलब कि मैं और मेरे पति पृथ्वीराज कपूर ) वापसी की ही तैयारी कर रहे थे!...फिर भी आधा घंटा और ठहर गए और इनके सानिंध्य का आनंद उठा ही लिया!... तब बात छिड़ गई थी इनके साथ हुए राखी सावंत की भिडंत की!...हा, हा, हा...
...राखी सावंत के तेवर तो टी.वी.चेनलों का गरम मसाला है ही ! ...लेकिन राखी सावंत को भी अलाबेलाजी ने तीखी हरी मिर्चे चटा दी...सुन कर वहा बैठे सभी वाह वाह कर उठे !...ब्लोगर मेले की असली आप-बिती तो अब राज भाटियाजी सुनाने वाले है!...इन्होने ही इस मेले का भार अपने कंधे पर या कंधों पर उठाया था!....हा, हा, हा!
ताजा समाचार मैं यहाँ दे रही हूँ कि अलबेला खत्री जी ...स्पर्धा क्रमांक -5 का ...हास्य-व्यंग्य प्रतियोगिता का ....आयोजन करने जा रहे है... जैसे कि 1,2,3 और 4 का कर चुके है!...इस बार उनका कहना है कि हास्य-व्यंग्य प्रतियोगियों द्वारा प्रस्तुत किए जाने चाहिए...मतलब कि हंसाने की जिम्मेदारी हम ब्लोगर्स की है...और हंसने की जिम्मेदारी उनकी है!......चाहे कविता हो, गजल हो,लेख हो, कहानी हो, निबंध हो, कार्टून हो ....कुछ भी चलेगा, लेकिन हँसाने में सक्षम होना जरुरी है!....अलबेला जी जरुर हसेंगे ...आप इस स्पर्धा में भाग ले कर तो देखिए...हा, हा, हा!
...एक प्रतियोगी एक ही रचना भेज सकता है! ....रचना भेजने कि अंतिम तारीख 15 दिसंबर है!... इनाम भी देने के लिए उन्होंने तैयार रखे हुए है!...तो Albelakhatri.com पर फ़ौरन दौड़ लगाइए और अपनी क्षमता का परिचय सभी को दीजिये!...हां, हा, हां!
...अगर यह खबर पढ़ कर हंसी आ जाए तो मेरे साथ बेशक ठहाका लगा सकतें है....हा, हा, हा!
Wednesday, 17 November 2010
चिठ्ठाकारों का संमेलन!..ब्लॉग विमर्श!
चिठ्ठाकारों का सम्मलेन!
ब्लॉग को चिठ्ठा कहा जाए तो ब्लोगर्स चिठ्ठाकार अपने आप ही हो गए!...मैंने भी बिना लाग-लपट के कह दिया रचनाजी!....वैसे आपने जिस संमेलन के बारे में लिखा है वह कब और कहाँ हुआ ...इसका पता आपने दिया नहीं है!...खैर!...जाहिर है इस संमेलन का आयोजन आपने नहीं किया था!...तो संयोजक कौन थे?...कृपया बताने का कष्ट करें!...वैसे आपने सारी जानकारी स्पष्ट रूप से दी है, धन्यवाद!
ब्लॉग विमर्श के लिए कुल 10 पॉइंट्स थे!... सभी पॉइंट्स विचारणीय है!
....अब ब्लॉग के जरिए हिंदी का उत्थान देखें तो यह हिंदी भाषा के प्रचार के लिए उत्तम मार्ग है!....जन साधारण को सिर्फ हिंदी पढने के लिए बाध्य कर के...हिंदी का उत्थान नहीं हो सकता!...उनके लिए लिखने की जगह उपलब्ध होना भी जरुरी है!...उन्हें जब लगेगा कि उनका लिखा हुआ पढ़ा जा रहा है, उस पर अन्य पाठक अपनी राय भी दे रहे है...तो वह और ज्यादा लिखेंगे और इस प्रकार हिंदी का प्रचार आगे बढेगा!..ब्लॉग लेखन इस प्रकार हिंदी भाषा को समृद्ध बना रहा है!
....हिंदी ब्लॉग से कमाई ....इस पॉइंट पर विचार करें तो परिणाम फिल हाल शून्य ही सामने आ रहा है!...और इसी वजह से जैसा कि एक अन्य पॉइंट है....ब्लोगरों कि संख्या घटती जा रही है! अपना बहुमूल्य समय ब्लॉग लिखने में खर्च करना हर किसी के बस की बात नहीं है!... जिन ब्लोगर्स का कमाई का अन्य जरिया बेहतरीन होता है, वही हिंदी ब्लॉग लिखने में रूचि लेते है!... मुझे लगता है मेरे इस विचार से सभी ब्लॉगर्स सहमत होंगे!...अब यह काम उस वेब-साईट का है जो हिंदी ब्लॉग्स के लिए ब्लोगर्स को आमंत्रित कर रहे है!
...ब्लॉग पर साहित्य का सृजन...यह भी एक ध्यान खिंचने वाला पॉइंट है!...माना कि हर लिखने वाला साहित्यिक नहीं होता!...लेकिन अगर कोई साहित्यिक ब्लॉग लिखने पर आमादा हो जाता है तो जाहिर है कि वह सभी के ध्यान अपनी तरफ खिंचता है!...उसकी कलम में यह शक्ति होती है!...लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अन्य ब्लोगर्स हीन भावना का अनुभव करें और पीछे हटें!...इसका अच्छा उदाहरण हमारी फिल्म इंडस्ट्री है!...अमिताभ बच्चन,शाहरुख खान, अक्षय कुमार जैसे बड़े कलाकारों के चलते हुए भी साधारण कलाकारों की तूती बज रही है!... अब साधारण कलाकारों की सूची आप स्वयं तैयार कर सकतें है!... बड़े नामी सिंगर्स के होते हुए भी छोटे सिंगर्स की मांग कम नहीं है!....तो इस बारे में यही कहना है कि ब्लॉग लिखने के लिए साहित्यिक होना जरुरी नहीं है...अपने विचार स्पष्ट रूप से लिख कर व्यक्त करने की कला ही पर्याप्त है!.
गुट बाजी :समीर और अनूप की... यह पॉइंट कैसे दर्ज हुआ यह समझ में नहीं आ रहा!... मैं समझती हूँ कि इस प्रकार की कोई गुट बाजी यहाँ नहीं है!
ब्लॉग पर पाठक बढ़ सकतें है!...ब्लोगर्स की संख्या बढ़ने के साथ साथ ही पाठकों की संख्या भी बढ़ सकती है!...इसके लिए ब्लोगर्स के लिए पारिश्रमिक उपलब्ध होना जरुरी है!...कैसे?...इसके लिए अलग से विमर्श होना चाहिए!..सभी ब्लोगर्स अपनी राय दें...अगर बोलने का मौका नहीं मिलता तो लिख कर अपने विचार सब के सामने रख सकतें है!
रचना जी को मैं यहाँ धन्यवाद देना चाहूंगी!....आपने बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे पर विचार व्यक्त करने के लिए आमंत्रित किया है!...
ब्लॉग को चिठ्ठा कहा जाए तो ब्लोगर्स चिठ्ठाकार अपने आप ही हो गए!...मैंने भी बिना लाग-लपट के कह दिया रचनाजी!....वैसे आपने जिस संमेलन के बारे में लिखा है वह कब और कहाँ हुआ ...इसका पता आपने दिया नहीं है!...खैर!...जाहिर है इस संमेलन का आयोजन आपने नहीं किया था!...तो संयोजक कौन थे?...कृपया बताने का कष्ट करें!...वैसे आपने सारी जानकारी स्पष्ट रूप से दी है, धन्यवाद!
ब्लॉग विमर्श के लिए कुल 10 पॉइंट्स थे!... सभी पॉइंट्स विचारणीय है!
....अब ब्लॉग के जरिए हिंदी का उत्थान देखें तो यह हिंदी भाषा के प्रचार के लिए उत्तम मार्ग है!....जन साधारण को सिर्फ हिंदी पढने के लिए बाध्य कर के...हिंदी का उत्थान नहीं हो सकता!...उनके लिए लिखने की जगह उपलब्ध होना भी जरुरी है!...उन्हें जब लगेगा कि उनका लिखा हुआ पढ़ा जा रहा है, उस पर अन्य पाठक अपनी राय भी दे रहे है...तो वह और ज्यादा लिखेंगे और इस प्रकार हिंदी का प्रचार आगे बढेगा!..ब्लॉग लेखन इस प्रकार हिंदी भाषा को समृद्ध बना रहा है!
....हिंदी ब्लॉग से कमाई ....इस पॉइंट पर विचार करें तो परिणाम फिल हाल शून्य ही सामने आ रहा है!...और इसी वजह से जैसा कि एक अन्य पॉइंट है....ब्लोगरों कि संख्या घटती जा रही है! अपना बहुमूल्य समय ब्लॉग लिखने में खर्च करना हर किसी के बस की बात नहीं है!... जिन ब्लोगर्स का कमाई का अन्य जरिया बेहतरीन होता है, वही हिंदी ब्लॉग लिखने में रूचि लेते है!... मुझे लगता है मेरे इस विचार से सभी ब्लॉगर्स सहमत होंगे!...अब यह काम उस वेब-साईट का है जो हिंदी ब्लॉग्स के लिए ब्लोगर्स को आमंत्रित कर रहे है!
...ब्लॉग पर साहित्य का सृजन...यह भी एक ध्यान खिंचने वाला पॉइंट है!...माना कि हर लिखने वाला साहित्यिक नहीं होता!...लेकिन अगर कोई साहित्यिक ब्लॉग लिखने पर आमादा हो जाता है तो जाहिर है कि वह सभी के ध्यान अपनी तरफ खिंचता है!...उसकी कलम में यह शक्ति होती है!...लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अन्य ब्लोगर्स हीन भावना का अनुभव करें और पीछे हटें!...इसका अच्छा उदाहरण हमारी फिल्म इंडस्ट्री है!...अमिताभ बच्चन,शाहरुख खान, अक्षय कुमार जैसे बड़े कलाकारों के चलते हुए भी साधारण कलाकारों की तूती बज रही है!... अब साधारण कलाकारों की सूची आप स्वयं तैयार कर सकतें है!... बड़े नामी सिंगर्स के होते हुए भी छोटे सिंगर्स की मांग कम नहीं है!....तो इस बारे में यही कहना है कि ब्लॉग लिखने के लिए साहित्यिक होना जरुरी नहीं है...अपने विचार स्पष्ट रूप से लिख कर व्यक्त करने की कला ही पर्याप्त है!.
गुट बाजी :समीर और अनूप की... यह पॉइंट कैसे दर्ज हुआ यह समझ में नहीं आ रहा!... मैं समझती हूँ कि इस प्रकार की कोई गुट बाजी यहाँ नहीं है!
ब्लॉग पर पाठक बढ़ सकतें है!...ब्लोगर्स की संख्या बढ़ने के साथ साथ ही पाठकों की संख्या भी बढ़ सकती है!...इसके लिए ब्लोगर्स के लिए पारिश्रमिक उपलब्ध होना जरुरी है!...कैसे?...इसके लिए अलग से विमर्श होना चाहिए!..सभी ब्लोगर्स अपनी राय दें...अगर बोलने का मौका नहीं मिलता तो लिख कर अपने विचार सब के सामने रख सकतें है!
रचना जी को मैं यहाँ धन्यवाद देना चाहूंगी!....आपने बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे पर विचार व्यक्त करने के लिए आमंत्रित किया है!...
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