Monday, 14 June 2010

बड़ी उम्र में मातृत्व!

स्त्रियों पर अत्याचार इस ढंग से भी ज़ारी है..
क्या कहने!...आज ही सुबह अखबार में पढ़ा...हिसार के सातरोड़ क्षेत्र में रहने वाली 66 वर्षीया भतेरी देवी ने तीन बच्चों को ... तिडवा ...बच्चों को जन्म दिया! अखबार के लिए भले ही यह खबर सनसनी जगाने वाली हो!... लेकिन एक स्त्री होने के नाते मुझे यह खबर विचलित करने के लिए पर्याप्त है!



...अब देखिए!... इसी अखबार में लिखा हुआ है कि भतेरी देवी को संतान प्राप्ति शादी के बाद कुछ वर्षों तक न होने की वजह से इनके पतिदेव ने दूसरी शादी रचाई... दूसरी पत्नी को भी संतान न होने के हालात में इस पतिदेव ने तीसरी शादी रचाई... नतीज़ा फिरभी शून्य रहा !.... इसके बाद ये हुआ कि इस पति महाशय की बाद की दोनों पत्नियां इनसे अलग हो गई!... और पहली पत्नी भतेरी देवी इनके साथ रहने लगी!... यह भी हो सकता है कि अब बुढ़ापा कैसे कटेगा सोच कर ही पतिदेव ने पहली पत्नी के साथ रहना शुरू कर दिया!...



...अब 66 साल के पति- पत्नी संतान के लिए कितने आशान्वित हो सकते है? ...फिरभी देखिये भतेरी देवी का इलाज चलता रहा और नैशनल फर्टिलिटी के डॉ अनुराग मिश्र ने उन्हें इस उम्र में मातृत्व दिलाया!



.... अब इस उम्र में तीन नवजात बच्चों की ...दो बेटे और एक बेटी की ...जिम्मेदारी भतेरी देवी कैसे उठा सकती है?.... उसका शरीर क्या इस उम्र के मातृत्व के लिए तैयार हो सकता है?... उसके पतिदेव तो चलिए इस उम्र में पिता बनकर ठाठ से घुम रहे है!... क्या इस उम्रमें पिता बनने में उन्हें कोई शारीरिक कष्ट हुआ या आगे होने वाला है?... भतेरी देवी के लिए बच्चों के जन्म से ले कर... आगे भी शारीरिक कष्टों की कमी नहीं है! ... इनके पतिदेव ने क्या यह सब सोचा?



... और भी इसी सन्दर्भ में एक उदाहरण है.... जींद की 70 वर्षिया राजोदेवी ने भी इसी सेंटर से , इस उम्र में मातृत्व प्राप्त किया!....



ऐसी खबरें अखबार वाले और असंभव को संभव बनाने वाले डॉक्टरों के लिए गर्व से सिर ऊँचा करने वाली है!... लेकिन उन स्त्रियों के बारे में भी तो सोचना चाहिए जिन्हें इतनी बड़ी उम्र में माताएं बनने के लिए मजबूर किया जाता है!.... मेरी निजी राय है कि बड़ी उम्र में भी मातृत्व अगर प्रदान करना हो तो भी... स्त्री की उम्र 50से ज्यादा न हो इस बात का ख़ास ध्यान रखा जाना चाहिए और यह नेक काम एक डॉक्टर ही कर सकता है!... स्त्रियों पर इस प्रकार से होनेवाला अत्याचार रोका जा सकता है!





11 comments:

indli said...

नमस्ते,

आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

Jandunia said...

सार्थक पोस्ट

girish pankaj said...

aapne jis peeda k sath apni baat kahi hai, log use samajh sake tab to..?

Udan Tashtari said...

निश्चित ही आपकी बात सही है.

दीपक 'मशाल' said...

सही चिंता व्यक्त की आपने सहमत हूँ..

Suman said...

mai bhi apse sahamat hoon..........

शोभना चौरे said...

apse shamt
isme daktar ki bhumika bahut mhtvpoorn hai .

रंजना said...

पुरुष ने संतान के लिए कई शादियाँ कीं यह निश्चित रूप से बहुत ही गलत है... साठ वर्षीय स्त्री तीन बच्चों को कैसे सम्हालेगी ,यह भी चिंता का विषय है,परन्तु स्त्री यदि स्वेच्छा से मातृत्व पाना चाहती है तो इसे उसपर अत्याचार ठहराना शायद ठीक नहीं...

रेखा श्रीवास्तव said...

ये सोचने वाली बात है, डॉक्टर के लिए एक उपलब्धि हो गयी और भतेरी देवी के लिए लोगों ने ख़ुशी की बात बना दी लेकिन क्या सोचा है कि इन बच्चों का भविष्य क्या होगा? क्या भतेरी देवी एक साथ तीन बच्चों को सभांलने में सक्षम होंगी. अभी कम से कम २० वर्ष तक इन बच्चों को सक्षम होने में लगेगा और तब तक भतेरी के पति की उम्र कम से कम ९० वर्ष होगी. इन बच्चों का भरण पोषण , शिक्षा दीक्षा और अन्य जरूरतों को पूरा करने में ये सक्षम रहेंगे. अगर नहीं तो ये बच्चे क्या करेंगे? अगर भतेरी देवी के पास अथाह संपत्ति है तब भी बच्चे उसको सभांलने काबिल भी नहीं होंगे. सृष्टि का सुख उठाना तो बहुत बड़ी बात है. अपनी इच्छाओं के लिए इन बच्चों का जीवन भी मजाक बन जाएगा.
ये तो विज्ञान के प्रयोग में तो सफल होने कि बात है लेकिन अगर मानवता के दृष्टिकोण से देखें तो ये एक जिम्मेदार व्यक्ति का काम नहीं है.

रचना said...

I fully agree with rekha
we need to think about the children before we take any decision
its all selfishness to just think about our own happiness only

aruna kapoor 'jayaka' said...

जो पति 66 या 70 वर्ष की उम्र में मां बनने वाली पत्नी को होने वाले कष्टों के बारे में नहीं सोच रहा...वह पैदा होने वाली संतान को भविष्य में होने वाली तकलिफों के बारे में क्या सोचेगा? ..वह तो सिर्फ इतना ही सोच रहा है कि मरने के बाद उसे मुखाग्नी देने के लिए वारिस आ गया!...उस स्त्री के अंतर्मन में झांकने ने पता चलेगा कि वह सिर्फ पति को खुश करने के लिए इस उम्र में संतान को जन्म दे रही है!

वैसे इतनी बडी उम्र में स्वेच्छा से मां बनने की इच्छा प्रकट करती स्त्री को ऐसा न करने के लिए समझाना... डॉक्टर और सामाजिक कार्यकर्ताओं का काम है!...कोई स्वेच्छा से कुएं मे छलांग लगाना चाहे तो क्या उसे रोकना हमारा काम नहीं है?

मै उन सभी साथी ब्लॉगर्स की आभारी हूं जो मेरे विचारों को समझ सकें है!