Tuesday, 8 June 2010

विज्ञापनों की भी अहमियत होती है!

मेरे ब्लॉग पर...विज्ञापन अंगडाइयाँ ले रहे है!

जी हाँ!... मैंने अपने ब्लॉग पर विज्ञापनों के लिए दरवाजे खोले हुए है!...
मुझे किसीने ई-मेल भेज कर जानना चाहा कि...." क्या आपकी धन कमाने की मनसा है, जो आपने विज्ञापनों को अपने ब्लॉग पर पनाह दी हुई है?"

.... उन महाशय को अलग से जवाब मैं दे सकती थी...लेकिन मैंने सोचा कि और भी कई साथी ब्लोगर्स यही सोच रहे होंगे ...लेकिन पूछने से कतरा रहे होंगे!...तो चलिए ब्लॉग लिख कर ही इसका खुलासा किया जाए!...

... सबसे पहली बात यह कि जो ब्लोगर्स कई सालों से हिंदी में ब्लॉग्स लिख रहे है वे अपना अनुभव बताते हुए कहते है कि ' हिंदी ब्लॉग्स द्वारा धन कमाना...रेत में से तेल निकालने के बराबर है! अपने पास रोजी-रोटी का अच्छा इंतजाम हो; तभी हिंदी ब्लौगिंग की तरफ मुड़ना चाहिए!... कमाई करने का इरादा हो तो, इंग्लिश में ब्लॉग लिखकर कमाई की जा सकती है! '

.... विज्ञापनों द्वारा भी कमाई करने के लिए फिरंगी भाषा का चोला ....मन माने या न माने...ओढ़ना पड़ता है!

... अब मेरे जैसे हिंदी की दिन-रात पूजा करने वाले ब्लॉगर्स ; फिरंगी भाषा का टिका तो माथे पर लगाएंगे नहीं!... कमाई करने की सोचना तो बहुत दूर की बात है!... रही विज्ञापनों को अपने ब्लॉग पर चिपकाने की बात!... तो मैं महज ब्लॉग की सजावट के लिए विज्ञापनों का इस्तेमाल कर रही हूँ! .... वैसे विज्ञापनों को मैं बुरा नहीं मानती!...किसी को कोई खरीदारी करनी हो तो वह जानकारी कहांसे हासिल करेगा?... या किसी को कोई चीज बेचनी हो तो वह क्या करेगा?... आज के जमाने में विज्ञापन की बहुत अहमियत है!

.... मुझे अब तक विज्ञापनों से कोई कमाई हुई नही है... न ही होगी!... लेकिन विज्ञापनों को मैं पनाह देती रहूंगी!... मैं पेशे से आयुर्वेदिक डॉक्टर हूँ ..और अब सिर्फ और सिर्फ हिंदी लेखन कार्य में व्यस्त हूँ! ...मेरा शौक हिंदी लेखन की प्रतियोगिताओं में भाग लेना भी है! अपनी चल-अचल संपत्ति के बारे में या विदेश यात्राओं के बारे में चर्चा करने की ये जगह नहीं है!... इसे अन्यथा भी लिया जा सकता है!

.... फिर एक बार कहने की गुस्ताखी करती हूँ की अपने ब्लॉग पर विज्ञापन मैं सजावट के लिए दे रही हूँ! ... मेरी कम्प्यूटर संबधित जानकारी मर्यादित है; फोटो या अन्य सामगी का सजावट के लिए इस्तेमाल करना मेरे बस की बात नहीं है!...

....हो सकता है बहुतसे ब्लॉगर्स मेरी ही तरह सोचते हुए विज्ञापनों को अपने ब्लॉग पर दे रहे हो!

4 comments:

माधव said...

बहुत ही अच्छी रचना.

Anonymous said...

जिन विज्ञापनों को आपने लगाया है उन्हें गूगल का बोट हिन्दी भाषा का पता लगते ही हटा देगा.

फिर तुम्हें मिलेगा ठेंगा बुढ़िया.

sajid said...

Bahut Accha jawab diya aap ne
ab us mahashya ko pata chal gaya hoga ke aap ne ad kyo liya

आचार्य जी said...

आईये जानें ....मानव धर्म क्या है।

आचार्य जी