Sunday, 23 November 2008

वधू चाहियें तो कैसी चाहियें

'वधू चाहिए....' तो कैसी चाहिए?


शादी के 'वधू चाहिए' विज्ञापनों पर आप भी नजर डालते होंगे और मैं भी डालती हूँ.... ऐसे विज्ञापनों से समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ, जीवनसाथी और शादी.कॉम जैसी वेब-साइट्स.... भरे पडे है!.... लड़की कुछ ऐसी चाहिए होती है....सुशील , उच्चशिक्षित, संस्कारी, लम्बी, पतली, बड़ों का आदर करने वाली.... दुनियाभर के सभी अच्छे गुणों से युक्त चाहिए होती है!... एक अहम् बात तो यह कि वैसे साथ साथ कामकाजी हो तो सोने पे सुहागा।!..... वैसे साथ साथ उसका घरेलु होना भी जरुरी है !.... लो ....कर लो बात!....ये तो ऐसा है कि लड़की खुलकर हँसे भी ....लेकिन हंसने की आवाज नहीं आनी चाहिए! लड़की को अपनी बात सामने रखने की पुरी स्वतंत्रता है... लेकिन वह अपना मुंह खोल नहीं सकती!...वह चाहे तो अपनी मरजी से लम्बी दौड़ लगा सकती है.... लेकिन शर्त यह कि वह अपनी जगह से हिल नहीं सकती!


कामकाजी लड़कियों की मांग कुछ ज्यादा ही है!.... वैसे महंगाई के जमाने में ये मांग सही भी है....लेकिन!.... यहाँ भी देखिए कि 'लेकिन' रास्ता रोके खड़ा है !.... अब वर पक्ष का कहना है कि लडकी सुशील होनी चाहिए!... अब लड़की अगर अपने कामकाज के क्षेत्र से जुड़े पुरुषों से हँसी मजाक कर लेती है, या किसी के साथ कभी कहीं आती जाती है तो उसकी सुशीलता पर प्रश्नचिंह लगाने से ससुराल वाले चुकते नहीं है!.... तो विज्ञापन में उसकी कमाई पर नजर क्यों रखतें है?


लड़की का कामकाजी होते हुए भी घरेलु होना जरुरी है.... मतलब कि घर के कामों में दक्ष भी हो और करे भी!... चूल्हा-चौका, ससुरालवालों की सेवा , मेहमानों की आवभगत....इतना सबकुछ संभालकर ही वह कामकाज करें!....इसका क्या मतलब? ....इसका मतलब कि वह घर और बाहर....दोनों क्षेत्रों की जिम्मेदारियां सभालें।...ऐसा क्यों?


क्या आज के युवा इतनी संकुचित मानसिकता से भरपूर है?... अगर नही है, तो 'वधू चाहिए' के ऐसे वाहियात विज्ञापनों पर रोक लगा दें।... और विज्ञापन देने से पहले यह तय कर ले कि वधू कामकाजी चाहिए या घरेलु चाहिए।... दो नावों में पैर रखकर यात्रा करने की तमन्ना रखने वालों का हश्र् क्या होता है.....ये हमें बताने की जरुरत नहीं है। लड़की का सुंदर, सुशिल, संस्कारी वगैरा वगैरा होना क्या होता है.... इसकी व्याख्या पहले तय करें!

14 comments:

Abhishek said...

इस देश की विडम्बना ही यही है, खाने के दांत और, दिखाने के और.
मेरे प्रयास में सहयात्री के रूप में जुड़ने का शुक्रिया.

Mired Mirage said...

हाहाहा, जब हँसने का विशेषकर कुछ satire पढ़ने का मन हो तो ये बहुत उपयोगी होते हैं । सबसे बढ़िया तो अंग्रेजी के होते हैं । wanted a fair,beautiful,slim,tall,convented,smart,professionally qualified working homely girl for a boy of 25(can be anywhere from 22 to 40+ and still remain a boy just as a woman of 30 or 40 + remains a girl!),should be proficient in managing home or (something to this effect ).
beautiful और smart भी चाहिए और homely भी ! homely के अर्थ हैं असभ्य,गृह्य,ग्रामीण,रूखा,सादा । अब कौन बताए कि beautiful और smart है तो homely नहीं हो सकती । beautiful and homely, smart and homely are oxymorons, contradiction in terms like 'pretty ugly' and 'the poor rich man' ! ये शब्द विरोधाभास दर्शाते हैं, विरोधालंकार हैं ।
खैर किसी का विवाह हो जाता है और बहुतों का मनोरंजन भी । एक पंथ दो काज ।
घुघूती बासूती

Udan Tashtari said...

यही विडंबना है.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

जो घुघूती जी के साथ हैं।

राज भाटिय़ा said...

अजी ऎसे लोगो को बहु नही एक कठपुतली चाहिये. जो इन के इशारो पर नाचे, हमारे यहां एक भारतीय को अपने बेटे के लिये सब गुणो से युकत ही बहु चाहिये थी, सब से सुंदर ओर जितने भी गुण दुनिया मै मिलते है, ओर वह हमेसा अन्या लोगो की बहुयो मै हजारो कमिया निकालते थे, पांच साल तक पुरी दुनिया मै ढुढा लेकिन ऎसी सुंदरी नही मिली जो उन की नजरो मै पास हो सकती, एक दिन बेटा एक युगोस्लवियन लडकी ले आया, अब कर्लो बात ...
मै आप की बात से सहमत हूं.
धन्यवाद

प्रदीप मानोरिया said...

सहज शब्दों में गंभीर बात भाषा का सहज प्रवाह
बधाई आपको नियमित पढ़ना आवश्यक हो गया है

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सटीक लिखा आपने ! ये हमारी बेडिया हैं ! हम बेटे और बेटी के मामले में अलग पैमाने रखते हैं ! अगर बेटे की बहु लाते समय जो सोच है वो सोच अपनी बेटी के लिए भी आदमी ज़रा सोच ले तो बहुत कुछ सुधर सकता है ! बहुत सामयीक पोस्ट है ! शुभकामनाएं ! और इब रामराम !

Dr. Nazar Mahmood said...

good one
keep going
take care

shyam kori 'uday' said...

... इतने सारे गुणों की लडकी मिल जायेगी तो महाशय संभालकर उसे कहाँ रखेगें? ... बहुत ही प्रसंशनीय लेख है।

sandhyagupta said...

Sach kaha aapne.

सतीश सक्सेना said...

बहुत अच्छा लेख, अधिकतर घरों की मानसिकता है यह, बहू और बेटी में फर्क करते समय हम यह नही सोचते कि दोनों को एक दूसरे का रोल निभाना ही पड़ेगा ! फ़िर शायद फर्क करते समय हमें कुछ तकलीफ हो ?

शैलेश भारतवासी said...

बहुत बढ़िया

सुनीता शानू said...

बहुत सही लिखा है। आज यह समस्या बढ़ती ही जा रही है,कामकाजी बहु चाहिये साथ ही घर का काम भी करें और पति सास-ससूर की सेवा से लेकर ननद देवरों बच्चों अडौस-पडौ़स सभी का ख्याल रखे...इसका शीर्शक रख दीजिये...हाईटेक होती वधुएं...

sanjaygrover said...

शादी के 'वधू चाहिए' विज्ञापनों पर आप भी नजर डालते होंगे और मैं भी डालती हूँ.... ऐसे विज्ञापनों से समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ, जीवनसाथी और शादी.कॉम जैसी वेब-साइट्स.... भरे पडे है!.... लड़की कुछ ऐसी चाहिए होती है....सुशील , उच्चशिक्षित, संस्कारी, लम्बी, पतली, बड़ों का आदर करने वाली.... दुनियाभर के सभी अच्छे गुणों से युक्त चाहिए होती है!... एक अहम् बात तो यह कि वैसे साथ साथ कामकाजी हो तो सोने पे सुहागा।!..... वैसे साथ साथ उसका घरेलु होना भी जरुरी है !.... लो ....कर लो बात!....ये तो ऐसा है कि लड़की खुलकर हँसे भी ....लेकिन हंसने की आवाज नहीं आनी चाहिए! लड़की को अपनी बात सामने रखने की पुरी स्वतंत्रता है... लेकिन वह अपना मुंह खोल नहीं सकती!...वह चाहे तो अपनी मरजी से लम्बी दौड़ लगा सकती है.... लेकिन शर्त यह कि वह अपनी जगह से हिल नहीं सकती!
wah kya baat hai. mujhe is tarah chutile andaaz meN pesh kiye gaye tark hamesha hi achchhe lagte haiN. umra aapki kitni bhi ho, vichaaroN se aap bilkul jawaan haiN, khaaskar un ladkiyoN ke muqable jo JEENZ pahan kar bhi dahez par laar tapkaati haiN aur ENGLISH bolte-bolte bhi KARWACHAUTHOn par bali-bali jaati haiN. Jeeti rahiye.